आएगा कभी मौसम सुहाना

आग सी तप्ति धूप में , खुद को संभालना हमने जाना ।

न रुके इस इंतज़ार मे , के आयेगा कभी मौसम सुहाना !

तेज़ बारिश मे अड़े रहे , न हिलेंगे था ये ठाना ।

आखिर कब तक इंतज़ार करेंगे ? के आएगा कभी मौसम सुहाना !

तय किया फिर आगे बढने का , ज़िंदगी की रीत को पहचाना ।

कड़कती सी ठंड मे भी , सीख लिया मन को बहलाना ।

हर मौसम को अब है हमने , पूरे मन से अपना माना ।

अब नहीं है इंतज़ार , के आएगा कभी मौसम सुहाना !

हर मौसम की खासियत को , इतने सालों बाद पहचाना ।

अब सारे मौसम अपने हैं , आए , न आए मौसम सुहाना !

भावार्थ


सुहाना मौसम ज़िंदगी के सुखद लम्हों को दर्शाता है । जब कभी भी आग सी तप्ति मुसीबतों का सामना मुझे अपने जीवन में करना पड़ा , तो मैंने मुसीबतों से परेशान होकर भागने के बजाए खुद को संभाल कर उनका सामना करना ठीक समझा । मैंने चुप-चाप बैठकर सुखद लम्हों के वापस आने का इंतज़ार नहीं किया बल्कि उन मुसीबतों का सामना किया ।
जब कभी भी मन रुआसा सा हुआ तो पहले तो उससे उभर पाना मुश्किल ज्ञात हुआ। फिर ख्याल आया की आखिर कब तक ऐसे ही रोते रहूँ , कब तक यूं ही बैठे- बैठे आँसू बहाते रहूँ और अच्छे वक्त के आने का इंतज़ार करूँ ।आखिर में मैंने तय किया के अब इन आंसुओं से आगे बढ्ना होगा , और जीवन के इस रीत को पहचाना के सुख -दुख तो ज़िंदगी में आते- जाते रहते हैं पर इससे ज़िंदगी तो नहीं रुक जाती ।
आगे जब कभी भी मन ठंड के मौसम के प्रकार दुखी हुआ तो खुद को बहला लिया ।अब जीवन के सारे सुख दुख को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा मान लिया है ।अब दुख में बैठ कर कभी ये नहीं सोचती कि काश वो सुखद वक्त लौट आएँ । बल्कि उस वक्त को भी अपना मान कर उसमे जीती हूँ और खुद को उस वक्त में ढाल लेती हूँ ।मैंने हर वक्त के खासियत को बहुत सालों बाद पहचाना है । ये जाना है कि हर वक्त कुछ न कुछ सीखा कर ही जाता है । अच्छा वक्त यादें और बुरा वक्त सीख दे जाता है । अब हर समय अच्छे वक्त की चिंता में न डूबकर , उस वक्त को जीती हूँ और उससे कुछ न कुछ ज़रूर सीखती हूँ।

https://poemsnwriteups.poetry.blog/

Copyright © 2023 poemsnwriteups.poetry.blog web hosting

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें