अंजाने थे , या जाने , इसकी मुझको खबर नहीं ।
बस इतना पता है कि , बुझी आस को अग्नि दी ।
ख्वाबों को दिये नए पंख और , मन का फिर उत्साह बढ़ा ।
अब लगता है ऐसा मुझको , रच दूँ इक इतिहास नया ।
इक पंछी सी हूँ मैं उड़ रही , मनमोहक सा है लग रहा गगन ।
तोड़ दिये हैं सब बंधन , अब जंग नयी लड़ने चली ।
उम्मीद नयी है उमड़ रही , अब दिये मैंने हैं कदम बढ़ा ।
अब चाहे जितनी मुश्किल हो , भरूँगी मैं नित नयी उड़ान ।

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