दिन बीत गए पुराने सारे , अब आया नया सवेरा है ।
सुख-दुख में यूं हँसकर गाकर , करना पार ये डेरा है ।
नयी उमंग खुशहली है आई , प्रगति का संदेश है लायी ।
खेलें खाएं खुशियाँ मनाएँ , कहती है मन की परछाई ।
गिरते-पड़ते सीखते चलते , बिता दिया इक पूरा साल ।
आया है अब ये नया वर्ष , फिर मचाएंगे सब खूब धमाल ।
करते-करते धमा-चौकड़ी , निकल जाएगा और एक साल ।
बच्चे बड़े हो जाएंगे , बदलेगा दुनिया का हाल ।

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