मौसम

एक ही देश कई दिशाएँ

कहीं पे धूप कहीं हवाएँ

मौसम की आज़ाद फिज़ाएँ

सब के मन में घर कर जाएँ।।

मन के मारे , हम बंजारे

आखिर कैसे मन बहलाएँ

चिंता-विंता कर लें तब भी

समझ न आये ,किधर को जाएँ।।

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