एक फूल अभी बस खिला ही था
नयी दुनिया से वो बस मिला ही था
महकाना था उसे आँगन का हर एक कोना
पर पड़ गया उसे अपना असतित्व खोना
चाहता था वो डालियों को सजाना ,
मगर उसकी इच्छा को आखिर किसने जाना ?
सब सोचते रहे कि कमजोर ही रहा होगा!!!
किसे पता था ?
उसने दुनिया को ही सब कुछ था माना
वो चला गया कुछ मन में दबाये !!
क्या बात थी? कोई इसका अंदाज़ा कैसे लगाए ?
ज़िंदगी तो उसे भी पसंद थी !!
पर मुरझाकर उससे जिया न जाये !!
दुनिया से वो बस मिला ही था
एक फूल अभी बस खिला ही था

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