बचपन

टॉफी के लिए ज़िदियाना था

रोते-रोते शोर मचाना था

नभ में उड़ने का सपना जाना-पहचाना था

चंदा मामा को अपने पास बुलाना था

यादों का वो पिटारा सुहाना था

बचपन का अंदाज़ बड़ा शायराना था।

डोरेमोन का चित्र बनाना था

झूले को ज़ोरों से झुलाना था

कितना मज़ेदार बारिश का आना था

स्कूल न जाने का वो कैसा बहाना था

मिमियाई आवाज़ में गाया गाना था

बचपन का अंदाज़ बड़ा शायराना था।

मां की गोद का नर्म सिरहाना था

स्वर्ग से सुंदर वो एक ठिकाना था

लोरी सुन कर सोने का ज़माना था

मन में सुकून , दिन भर मुस्कुराना था

नन्हे से उर में प्यार का खज़ाना था

बचपन का अंदाज़ बड़ा शायराना था।

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