बेटियाँ

झाँसी की रानी सी वीर बेटियाँ

ज़ोया अग्गरवाल सी बुनती तकदीर बेटियाँ

ऐसा कौन सा कार्य है जो एक बेटी नहीं कर सकती ?

अफसर बन के नाम करे है, घर का ध्यान भी रखती ।

दया कि देवी , लष्मीरूपिणी , अन्नपूर्णा कहलाती

समय आने पर शस्त्र उठा माँ दुर्गा भी बन जाती

रचनाओं की प्रशंसा ,कहां सभी कर पाते हैं

कुछ लोग बेटियों को बोझा कहकर ठुकराते हैं।

पुष्प सा नम्र हृदय लिए जन्म कन्या का होता है

भ्रूण-हत्या करने वाला तो खून के आँसू रोता है।

हीरे के गुण से अनजान , कोयला नाम बताए

अब तो जागो , नगर वासियों घोर अँधेरा छाए

शक्ति का त्याग करके जीवन कैसे जी पाओगे

शपथ करो हर बेटी को पूरे मन से अपनाओगे।

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