शाम हो गयी है एक और दिन गुज़र गया
जिस वक्त का इंतज़ार था वो जाने किधर गया
आसमान आसमानी छोड़ सब रंग बिखेरे हुए है
ये दृश्य देखते ही मेरा दिन संवर गया।
मौसम का हाल क्या खूब हुआ रक्खा है
अद्भुत वातावरण देखने में कितना अच्छा है
ये देख मेरा मन न जाने क्यों भर गया
जब झुंड पक्षियों का अपने -अपने घर गया।
धीरे -धीरे सब रंगों का मेल हुआ
हवाएं ऐसे चलीं मानो कोई खेल हुआ
निगाहें थम गयीं सर टिक कर रह गया
छाया अंधेरा ,रात हुई
शाम इस अंधेरे में कहीं छुप कर रह गया।

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