याद तू करेगा जब वो आवतार आएगा1
ढूंढता रहेगा तू वो लौट के जो जाएगा
ज्ञान न तुझे है उसके जादुई प्रकाश का5
क्रोध में है जो करे वो तीव्र से विनाश का
भोला है वो आशुतोष उदारता का पात्र है2
भूलना न वो गुरु है और तू उसका छात्र है
ध्यान जो करे वो उसके प्राण का बने है ढाल4
और जो निकृष्ट हो तो उसका वो बने है काल
भाग के जाना कहाँ वो हर जगह ही व्याप्त है3
मन जो स्वच्छ हो तो वो सरलता से ही प्राप्त है
तेरे कर्मों का तू फल इसी जनम में पायेगा6
फल देने को काल का वो चक्र जब घुमाएगा
याद तू करेगा जब वो आवतार आएगा7
ढूंढता रहेगा तू वो लौट के जो जाएगा।

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